भोपाल। 1 से 7 अगस्त तक जारी 'विश्व स्तनपान सप्ताह' के मद्देनजर , PETA इंडिया और एनिमल्स विद हयूमैनिटी ने 5 अगस्त को राजधानी भोपाल के बोट क्लब पर कार्यक्रम आयोजित किया। इस कार्यक्रम में दो लोगों ने बच्चों की 2.5 मीटर लंबी ड्रेस पहनकर लोगों को वीगन दूध के पैकेट बांटे। यह वीगन दूध मेवों और अन्य पेड़-पौधों से मिली चीजों से तैयार किया गया था। इस दौरान दोनों ने हाथों में एक साइन बोर्ड भी पकड़ा था। इस पर लिखा था, "दूध बच्चों के लिए है। डेयरी छोड़ो।" पेटा इंडिया ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य लोगों को यह याद दिलाना होगा कि सभी स्तनपायी प्रजातियों की माताएं, जैसे कि गाय और मनुष्य, अपने बच्चों के लिए दूध का उत्पादन करती हैं और एक उम्र के बाद दूध पीने की कोई जरूरत नहीं होती।
PETA इंडिया की न्यूट्रिशनिस्ट और सीनियर मैनेजर ऑफ वीगन एंड कॉर्पोरेट प्रोजेक्ट्स, डॉ. किरण आहूजा कहती हैं, "जैसे महिलाएं अपने बच्चों आहार के लिए दूध पैदा करती हैं, वैसे ही गायें भी अपने नवजात बछड़ोंके लिए ही दूध देती हैं, लेकिन उनके बछड़े उनसे छीन कर अलग कर दिए जाते हैं ताकि उनके हिस्से का दूध चुराकर इंसानों को बेचा जा सके। PETA इंडिया उन सभी लोगों से अपील करता है, जो मां और बच्चे के बीच के इस अनमोल रिश्ते को समझते और सम्मान देते हैं, वे डेयरी छोड़कर नट्स या अन्य पेड़-पौधों से बनें या बाजार में उपलब्ध स्वादिष्ट और पोषक वीगन दूध, दही, और चीज का सेवन करें।"
जानवरों पर होता है इतना अत्याचार
डेयरी उद्योग में गायों और भैंसों को जबरन गर्भवती किया जाता है। उनके नवजात बछड़ों को जन्म के कुछ समय बाद ही उनसे छीन लिया जाता है। अक्सर नर बछड़ों को बेकार समझकर सड़कों पर फेंक दिया जाता है, जहां वे भूखे-प्यासे तड़पते हैं, या फिर उन्हें उनका मांस और चमड़ा निकालने के लिए बेच दिया जाता है। मादाओं को दूध देने वाली मशीन की तरह इस्तेमाल किया जाता है, जब तक उनका शरीर सहन कर पाए फिर उनका त्याग कर दिया जाता है या उनकी हत्या कर दी जाती है।
हमें है इतना फायदा
विश्व के सबसे बड़े खाद्य और पोषण विशेषज्ञों के संगठन, अकादमी ऑफ न्यूट्रिशन एंड डायटेटिक्स के अनुसार, वीगन आहार अपनाने वालों में कई गंभीर बीमारियों जैसे इस्कीमिक हार्ट डिज़ीज़, टाइप 2 डायबिटीज, उच्च रक्तचाप, कुछ प्रकार के कैंसर और मोटापे का खतरा कम होता है। वहीं, ऑक्सफ़ोर्ड विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं का मानना है कि मांस और डेयरी मुक्त भोजन अपनाने से किसी व्यक्ति के खाद्य से जुड़ा कार्बन उत्सर्जन 73% तक कम किया जा सकता है। जो लोग मलाईदार स्वाद का आनंद लेते हैं, उनके लिए मेवे, जई, बीज, बाजरा, सोया, चावल या अन्य पेड़-पौधों से बना मिल्क एक पौष्टिक और स्वादिष्ट विकल्प है।
