मनोज मीक
भारत के शहरी विकास की गति अब छोटे शहरों और कस्बों की पारंपरिक परिभाषा से आगे निकल चुकी है। जैसे-जैसे शहर जनसंख्या, अर्थव्यवस्था और तकनीक के केंद्र बनते जा रहे हैं, वैसे-वैसे उनके प्रभाव क्षेत्र भी बढ़ रहे हैं। ऐसे में केवल नगर निगम क्षेत्र तक सीमित योजना, भविष्य की जरूरतों और दबावों का समाधान नहीं कर सकती। इसी संदर्भ में “मेट्रोपॉलिटन रीजन” की समग्र और बहुस्तरीय योजना का महत्व अत्यधिक बढ़ जाता है। यदि मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र की योजना को विश्वस्तरीय सिद्धांतों के साथ, स्थानीय परिप्रेक्ष्य में, और जन-सहभागिता के माध्यम से बनाया गया, तो यह चौथी औद्योगिक क्रांति में मध्यप्रदेश को अग्रणी बनाएगा और भोपाल व इंदौर को एक आदर्श, स्मार्ट और सतत नगरीय युग में प्रवेश कराएगा।
योजना की जरूरत को इन पॉइंट्स में समझें
1. भौगोलिक विस्तार और परिधीय क्षेत्रों का एकीकरण:
शहरों के चारों ओर के उपनगर, कस्बे, गांव और औद्योगिक क्षेत्रों का विकास बिना समन्वय के अनियंत्रित होता है। मेट्रोपॉलिटन रीजन प्लानिंग इन सभी क्षेत्रों को एक एकीकृत विकास फ्रेमवर्क में लाती है।
2. लॉजिस्टिक्स और परिवहन कनेक्टिविटी:
राजधानी क्षेत्र और इंदौर जैसे वाणिज्यिक शहरों में लॉजिस्टिक्स, एआई इंफ्रा और इंडस्ट्रियल कॉरिडोर का सुव्यवस्थित विकास केवल मेट्रोपॉलिटन दृष्टिकोण से ही संभव है।
3. सस्टेनेबिलिटी और पर्यावरणीय संतुलन:
जल स्रोत, वन क्षेत्र, कृषि भूमि और वेटलैंड्स की सुरक्षा के लिए क्षेत्रीय प्लानिंग आवश्यक है, जो सस्टेनेबल ग्रोथ सुनिश्चित करती है।
4. राजनीतिक समावेश और शासन की पारदर्शिता:
मेट्रोपॉलिटन रीजन अथॉरिटी में बहुस्तरीय प्रतिनिधित्व (राज्य सरकार, स्थानीय निकाय, विशेषज्ञ) शासन को जनसामान्य के प्रति अधिक उत्तरदायी बनाता है।
स्मार्ट सिटीज़ मिशन की सीमाएं, और उनसे मिलने वाले सबक:
1. पायलट एरिया पर अत्यधिक फोकस:
स्मार्ट सिटीज़ में “एरिया बेस्ड डेवलपमेंट” के कारण संपूर्ण शहर की अपेक्षा केवल कुछ इलाकों में ही परिवर्तन दिखाई दिया। इससे सामाजिक असमानता और नागरिक असंतोष भी बढ़ा।
2. लोकल बोडीज़ की सीमित भागीदारी:
प्रोजेक्ट स्पेशल पर्पज़ व्हीकल के ज़रिए काम होने से स्थानीय निकायों और जनप्रतिनिधियों की भागीदारी कम रही।
3. इंटीग्रेटेड मास्टर प्लान की कमी:
स्मार्ट सिटी योजनाएं मौजूदा दशकों पुराने मास्टर प्लान पर चलती रहीं, नए प्लान के अभाव और वास्तविक से अधिक गाइडलाइन दरों के कारण दीर्घकालिक दृष्टिकोण का अभाव रहा।
4. डिजिटल इंफ्रा का सीमित विस्तार:
तकनीक और स्मार्ट टूल्स के नाम पर केवल सीसीटीवी या वाई-फाई प्वाइंट्स तक सीमित होना व्यापक बदलाव नहीं ला सका।
आगे बढ़ने की राह – मेट्रोपॉलिटन रीजन बिल में ये बातें अनिवार्य होनी चाहिए:
• इंटीग्रेटेड रीजनल मास्टर प्लान जो 30-50 वर्षों की रणनीति के साथ बने।
• एआई व लॉजिस्टिक्स हब की पहचान और विकास के लिए विशेष ज़ोनिंग।
• पब्लिक ट्रांसपोर्ट नेटवर्क मेट्रो, बस रैपिड ट्रांजिट, हाइवे लिंक को समावेशी रूप से डिज़ाइन करना।
• राजा भोज जैसे ऐतिहासिक शासक की समावेशी बौद्धिक परंपरा से प्रेरणा, जिसमें जल, भू-प्रबंधन, स्थापत्य और लोकहित एक साथ चलते थे।
• मल्टी-स्टेकहोल्डर गवर्नेंस, जिसमें विशेषज्ञ, स्थानीय संस्थाएं, इंडस्ट्री प्रतिनिधि, और आम नागरिक सहभागी हों।
भोपाल-इंदौर के लिए विश्वस्तरीय मेट्रोपॉलिटन प्लानिंग सिद्धांत
1. Polycentric Urban Structure (EU Spatial Strategy)
एकल शहर केंद्र पर निर्भर न रहकर, मल्टी-नोडल विकास करें –
भोपाल: मंडीदीप, कोलार, गोविंदपुरा, भानपुर, एयरपोर्ट ज़ोन
इंदौर: पीथमपुर, सांवेर, सुपर कॉरिडोर आदि को मेट्रोपॉलिटन नोड्स के रूप में विकसित करें।
2. Transit-Oriented Development (Singapore, Hong Kong)
रेलवे स्टेशन, बस पोर्ट, एयरपोर्ट जैसे हब के चारों ओर हाई डेंसिटी, मिक्स्ड-यूज़ विकास करें।
उदाहरण: रानी कमलापति स्टेशन और आईएसबीटी हब को ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) जोन घोषित करें।
3. Blue-Green Infrastructure Planning (Copenhagen Model)
झीलों, नालों, ग्रीन बेल्ट और जंगलों को सस्टेनेबल ज़ोन के रूप में संरक्षित करें।
भोपाल के बड़े तालाब और इंदौर के कैचमेंट क्षेत्र इस दृष्टि से अहम हैं।
4. 15-Minute City (Paris Model)
नागरिकों को 15 मिनट की दूरी पर सभी सुविधाएं (काम, स्कूल, स्वास्थ्य, पार्क) उपलब्ध हों। यह सोशल इन्क्लूजन और सस्टेनेबिलिटी दोनों के लिए जरूरी है।
5. Data-Driven Governance (Seoul Smart City)
मेट्रोपॉलिटन क्षेत्रों के लिए एआई आधारित डैशबोर्ड और डिसीजन सपोर्ट सिस्टम बनाए जाएं।
6. Inclusive Governance (Barcelona, Medellín)
नागरिकों की भागीदारी से अरबन लैब्स और मेट्रोपॉलिटन बोर्ड का संचालन हो। युवाओं, महिलाओं और प्रोफेशनल्स की भूमिका तय की जाए।
7. Land Value Capture (Tokyo, London)
जिस ज़ोन में पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर से भूमि मूल्य बढ़े, वहां आंशिक रिटर्न लेकर नई परियोजनाओं में पुनर्निवेश किया जाए।
8. Climate Resilient Urban Planning (New York, Rotterdam)
स्मार्ट जल प्रबंधन, रेन वाटर हार्वेस्टिंग, फ्लड ज़ोन कंट्रोल, सौर ऊर्जा नीतियां अनिवार्य हों।
9. AI + Logistics Integration (Dubai, Shenzhen)
राजधानी मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र में एआई लाइटहाउस जोन, क्लीन कंप्यूट इंफ्रास्ट्रक्चर, लॉजिस्टिक पार्क्स हों।
जैसे: भोपाल में आईटी-सेज + डाटा हब और इंदौर में ई-कॉमर्स फुलफिलमेंट क्लस्टर
10. Unified Metropolitan Transport Authority (London, Tokyo)
एकीकृत टिकट, डेटा प्लेटफ़ॉर्म और मोबिलिटी सिस्टम – दोनों शहरों के लिए मेट्रोपॉलिटन मोबिलिटी बोर्ड का गठन हो।
मेट्रोपॉलिटन विधेयक 2025 सुसंगत विशेषज्ञ बिंदु:
1. राजधानी क्षेत्र (भोपाल) को वाजिब प्राथमिकता मिले
• कारण: यह प्रदेश की राजधानी है, प्रशासनिक और नीति-निर्माण का केंद्र।
• प्रस्ताव: राजधानी क्षेत्र को अतिरिक्त फंडिंग, लॉजिस्टिक्स हब, व एआई इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए विशेष स्टेटस मिले।
2. ग्लोबल मेट्रोपॉलिटन प्लानिंग के मानक अपनाए जाएं
• संदर्भ: सिंगापुर यूआरए, लंदन जीएलए, और पेरिस मेट्रो रीज़न से प्रेरणा।
• प्रस्ताव: योजना की समीक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का श्वेतपत्र आमंत्रित किया जाए।
3. राजा भोज की स्थापत्य-बौद्धिक परंपरा से सीखें
• उदाहरण: समरांगण सूत्रधार आधारित समावेशी, जल-आधारित, पर्यावरण-संगत शहरी ढाँचा।
• प्रस्ताव: भोजपाल रीजन, के आसपास स्मार्ट जल-अर्थव्यवस्था और मिश्रित भूमि उपयोग मॉडल का विकास।
4. लॉजिस्टिक्स और एआई इंफ्रास्ट्रक्चर को केंद्र में लाएं
• प्रस्ताव: भोपाल को सेंट्रल इंडिया का पहला एआई लाइटहाउस और मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक नॉड घोषित किया जाए।
5. संसाधन और योजना में समानता (इंदौर-भोपाल )
• आपत्ति: इंदौर को बार-बार “बिजनेस कैपिटल” बताकर अनुपातहीन तरीके से लाभ दिया गया है।
• प्रस्ताव: दोनों मेट्रो क्षेत्रों के लिए बराबरी की आधारभूत योजना बने — पारदर्शिता और संतुलन के साथ।
6. क्षेत्रीय संतुलन व समावेशिता
• प्रस्ताव: भोपाल मेट्रो रीज़न में सीहोर, रायसेन के साथ-साथ भोजपुर, विदिशा, नर्मदा क्षेत्र को भी कवर किया जाए।
7. विधेयक की समीक्षा प्रक्रिया और नागरिक संवाद
• प्रस्ताव: विधेयक को स्टैंडिंग कमिटी में भेजा जाए और राजधानी व व्यापारिक संगठनों से लिखित सुझाव मांगे जाएँ।
8. राजधानी क्षेत्र के लिए विशेष दर्जा (Capital Region Advantage)
• राजधानी भोपाल को ‘स्पेशल स्ट्रैटेजिक कैपिटल रीजन’ घोषित किया जाए, जिससे उच्च प्रशासनिक और संस्थागत ढांचे के अनुरूप विशेष इंफ्रास्ट्रक्चर और इन्वेस्टमेंट मिले।
• ‘इंटीग्रेटेड कैपिटल रीजन प्लानिंग बोर्ड’ की स्थापना हो, जो भोपाल व आसपास के 7 ज़िलों की एकीकृत योजना, निवेश और आपदा प्रबंधन सुनिश्चित करे।
9. इंदौर व भोपाल को समान अवसर
• इंदौर को कमर्शियल और भोपाल को एआई, लॉजिस्टिक्स व गवर्नेंस-इनोवेशन हब के रूप में स्पष्ट रूप से परिभाषित किया जाए।
• दोनों मेट्रोपॉलिटन क्षेत्रों में, क्लीन एनर्जी और ट्रांसपोर्ट गेटवे हेतु विशेष ज़ोन की स्थापना हो।
10. ग्लोबल मानकों पर आधारित टाउन प्लानिंग
• टाउन प्लानिंग बोर्ड में अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ (जैसे यूएन-हैबिटेट, आईटीडीपी, एमआईटी अर्बन स्टडीज) को शामिल कर रोडमैप बनाया जाए।
• प्रत्येक मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र में 30-वर्षीय मास्टर प्लान तैयार हो, जिसमें क्लाइमेट, मोबिलिटी, डाटा इंफ्रा और हेरिटेज को संतुलित किया जाए।
11. राजा भोज का स्थापत्य मॉडल और सम्रांगण सूत्रधार
• मेट्रोपॉलिटन विकास में “सम्रांगण सूत्रधार” जैसे प्राचीन भारतीय नगर नियोजन ग्रंथों से मार्गदर्शन लिया जाए।
• राजा भोज द्वारा विकसित झील-आधारित शहरी मॉडल को आधुनिक ‘ब्लू-ग्रीन इंफ्रा प्लानिंग ’ के साथ जोड़ा जाए।
12. एआई और लॉजिस्टिक्स हब के रूप में प्राथमिकता
• भोपाल और इंदौर दोनों में एआई-रेडी जोन, डाटा सेंटर पार्क्स, स्मार्ट वेयरहाउसिंग क्लस्टर्स स्थापित किए जाएं।
• राजधानी क्षेत्र को भारत का पहला “क्लीन कंप्यूट कैपिटल ” बनाने के लिए नीति बनाई जाए।
13. समावेशी व ट्रांसपेरेंट गवर्नेंस स्ट्रक्चर
• मेट्रोपॉलिटन प्लानिंग कमेटी में स्थानीय निकायों, जनप्रतिनिधियों, रेरा, क्रेडाई, सीईओ की भागीदारी अनिवार्य हो।
• समस्त मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र की कार्यप्रणाली को रीयल टाइम डैशबोर्ड+ पब्लिक ऑडिट एक्सेस के साथ डिजिटाइज किया जाए।
14. स्मार्ट व सतत परिवहन नेटवर्क
• भोपाल-इंदौर मेट्रोपॉलिटन बेल्ट को जोड़ने के लिए रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) प्रस्तावित किया जाए।
• बड़े शहरों के बाहर स्मार्ट बायपास + ई-बस कॉरिडोर का नेटवर्क विकसित हो।
15. जनभागीदारी व नीति संवाद
• मेट्रोपॉलिटन बिल लागू होने से पूर्व लोक संवाद (Public Consultation) की प्रक्रिया अनिवार्य हो।
• दोनो शहरों की योजनाओं में नागरिक, उद्योग, स्टार्टअप, और बुद्धिजीवियों को सक्रिय रूप से सम्मिलित किया जाए।
(लेखक मेट्रोपॉलिटन एनालिस्ट, शहरी विकास शोधकर्ता और कमाल का भोपाल अभियान के फाउंडर हैं- ये उनके निजी विचार हैं)
